Sunday, February 23rd, 2020

अर्थव्यवस्था की हालत चिंताजनक

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक खबर आई है. दूसरी तिमाही में विकास दर (GDP) घटकर 4.5% पहुंच गई है. इस पर महान अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने कहा है कि हमारी अर्थव्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हालत में पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि हमारे समाज की स्थिति और भी चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि हमें अपनी अर्थव्यवस्था में मौजूदा भय को खत्म करना होगा. आत्मविश्वास पैदा करने की जरूरत है कि हमारी अर्थव्यवस्था 8% की रफ्तार से बढ़ेगी. अर्थव्यवस्था की स्थिति अपने समाज की स्थिति का प्रतिबिंब है। फिलहाल सामाजिक भरोसे का ताना-बाना टूट गया है, जिसे जोड़ने की जरूरत है.

इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि असफल मोदीनॉमिक्स और पकोड़ा इकोनॉमिक विजन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गहरे आर्थिक मंदी में डुबो दिया है.

मालूम हो कि ताजा जीडीपी के आंकड़े 4.5% पिछले 6 साल में सबसे कम स्तर पर है. पहली तिमाही में विकास दर 5% रही थी. दूसरी तिमाही में माइनिंग ग्रोथ 0.1%, कंस्ट्रक्शन ग्रोथ 8.5% से घटकर 3.3%, मैन्युफैक्चरिेंग ग्रोथ 6.9% से घटकर 1% सर्विस सेक्टर ग्रोथ 7.3% से घटकर 6.8%, इंडस्ट्री ग्रोथ 6.7% से घटकर 0.5% रही.

अक्टूबर में खुदरा महंगाई 16 महीने के ऊपरी स्तर पर है. बेरोजगारी में लगातार बढ़ोतरी, 2017-18 में 6.1% रही. अक्टूबर में लगातार तीसरे महीने निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है. बैंकिंग और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर दिक्कतों का सामना कर रहा है. ऑटो, टेलीकॉम, बैंक सहित कई सेक्टर में छंटनी हो रही है.

भारत की वृद्धि दर जी-20 देशों में सबसे तेज : सीतारमण
लोकसभा में 18 नवंबर को सरकार ने आर्थिक मंदी को लेकर हुए एक सवाल के जवाब में जीडीपी गिरने की बात तो स्वीकार की, मगर साथ ही यह भी कहा कि भारत जी-20 में सबसे तेज दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक लिखित जवाब में कहा, '2014-19 के दौरान औसत जीडीपी वृद्धि 7.5 प्रतिशत थी, जो कि जी-20 देशों में सर्वाधिक है. वर्ष 2019 के वल्र्ड इकोनॉमिक आउटलुक( डब्ल्यूईओ) ने वैश्विक उत्पादन और व्यापार में अच्छी-खासी मंदी का अनुमान लगाया है. फिर भी हाल में जीडीपी में कुछ कमी के बावजूद डब्ल्यूईओ के अनुमान के अनुसार भारत जी-20 देशों में सबसे तेज दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था है.'

दरअसल, सांसद एन.के. प्रेम चंद्रन ने सरकार से पूछा कि क्या सरकार ने आर्थिक मंदी के कारणों, विदेशी व्यापार समझौते या जीएसटी से इसके कनेक्शन की कोई पड़ताल की है? उन्होंने यह भी पूछा था कि मंदी से निपटने के लिए क्या सरकार आर्थिक नीतियों में परिवर्तन करेगी?


निर्मला ने बताया कि देश की जीडीपी वृद्धि दर को बढ़ाने के लिए सरकार अर्थव्यवस्था में संतुलित स्तर की निश्चित निवेश दर, कम निजी उपभोग दर और निर्यात को बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है.

वित्तमंत्री ने बताया कि विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में जीएसटी के बाद भारत की रैंकिंग 2018 के 77 के बदले 2019 में 63 हो गई. उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में निवेश का माहौल बनाने के लिए सरकार ने कई सुधार किए हैं, ताकि भारत पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर अर्थव्यवस्था वाला देश बन सके. उन्होंने बताया कि निवेश के लिए माहौल बनाने के लिए हाल ही में कारपोरेट टैक्स की दर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दी गई.

2020 की दूसरी तिमाही में 4.7 फीसदी रह सकती है वृद्धि दर : आईसीआरए
इसी महीने रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने वित्त वर्ष 2020 के दूसरी तिमाही में भारत की वृद्धि दर घटकर 4.7 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया था. ऐसा औद्योगिक उत्पादन के कमजोर होने की वजह से होगा. रेटिंग एजेंसी ने भारत की जीडीपी की वृद्धि दर में आगे और गिरावट का अनुमान लगाया है और ग्रास वैल्यू एडेड (जीवीए) वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में 4.7 फीसदी से 4.5 फीसदी रहने की संभावना है. हालांकि, कृषि व सेवा जैसे क्षेत्र वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में दर्ज वृद्धि दर को बनाए रखने में सक्षम हो सकते हैं.


आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'घरेलू मांग, निवेश गतिविधि में कमी के कारण वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही के मार्जिनल 0.6 फीसदी से मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि के सुस्त रहने की संभावना है. PLC

Comments

CAPTCHA code

Users Comment