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Monday, November 30th, 2020

अमिट छाप छोड़ गया राष्ट्रीय शिल्प मेला.--गायन व लोकनृत्यों ने किया लोगों का मनोरंजन

-स्टालों से इलाहाबादियों ने जमकर की खरीददारी

DSC_0024प्रवीण राय ,

आई एन वी सी ,
इलाहाबाद,
शहर में लगा राष्ट्रीय शिल्प मेला अब केवल याद बनकर रह जायेगा। एनसीजेडसीसी में 20 दिसंबर से प्रारंभ होने वाला राष्ट्रीय शिल्प मेला खत्म तो जरूर हो गया लेकिन इसकी याद व मस्ती लोगों की यादों में लंबे समय तक  बनी रहेगी। 20 से 30 दिसंबर तक चले इस मेले का लोगों ने भरपूर मजा लिया। एक दर्जन से ज्यादा प्रदेशों से आये लोक गायकों, लोक कलाकारों व शिल्पियों के प्रदर्शन ने 10 दिनों तक शहर के लोगों का भरपूर मनोरंजन किया और लोगों को खरीदारी करवायी। मेले में पाण्डवानी नृत्यंागना तीजन बाई के साथ छाऊ, कालवेलिया, कश्मीरी व  कच्ची घोड़ी जैसे नृत्यों ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। इसी तरह  राष्ट्रीय शिल्प मेले में खाने के स्टाल उत्तरांचल, राजस्थान व पंजाब के लोगों ने लगाये थे जबकि ज्वेलरी आदि की दुकानें विभिन्न प्रदेशों से आये शिल्पियों ने लगायी थी। हरियाणा से आयी हरियाणवी जलेबी लोगों के आकर्षण का केन्द्र थी और कोई एक व्यक्ति इसे खाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इसी तहर कोलकाता से पुतुल मित्रा द्वारा बनाई गयी धान की ज्वेलरी भी लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। यह ज्वेलरी सस्ती और लंबे समय तक चलने के कारण लोगों में चर्चा का विषय रही । फैशन डिजाइनिंग का  कोर्स करने वाली नेहा सिंह का कहना था कि मेले में बहुत से स्टाल ऐसे थे जिन्हें देखने और सामान खरीदने का मन करता था लेकिन मेले के समाप्त होने पर अब एनसीजेडसीसी खाली-खाली लगेगा और घूमने के लिए और मेले में मस्ती करने के लिए हमें एक वर्ष का इंतजार करना पड़ेगा। मेले मे राजस्थानी खाने के स्टाल की भी धूम रही यहां पर मूंग के दाल की कचौड़ी और पकौड़े का लोगों ने छक कर आनंद लिया। पश्चिम बंगाल से आयी मिता भक्ता का स्टाल 70 था और यहां पर  जूट के सैंडिल की स्टाल लगी थी और लड़कियों तथा महिलाओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई थी। इसी तरह राजस्थानियों द्वारा लगाया गया राजस्थानी अचार भी लोगों के विशेष रहा। कुछ लोगों ने तो अचार की गुणवत्ता जानने के बाद अपने परिवार के लिए ज्यादा मात्रा में अचार खरीद कर रख लिया ताकि वर्ष भर राजस्थानी अचार का स्वाद लिया जा सके। इसी तरह टेराकोटा, फ्लावर पाट, मदुरई का काटन साड़ियां व घर को सजाने के सामानों ने इलाहाबादियों को मेले में खूब खरीददारी करवाई। कुल मिलाकर राष्ट्रीय शिल्प मेले ने 11 दिनों तक प्रयाग वासियों को भरपूर मनोरंजन कराया और लोगों ने इसकी यादें अपने सोशल नेटवर्किंग साइट और सामानों के रूप में अपने घरों में सहेज कर रखना शुरू कर दिया है।

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