Thursday, October 24th, 2019
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अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी

नई दिल्‍ली: ED केस में पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. ED की ओर से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता अपनी दलीलें रख रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि जांच रिपोर्ट चिदंबरम के साथ साझा तब तक नहीं की जा सकती जब तक कि कि चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह सिर्फ अग्रिम ज़मानत का मामला है, भ्रष्टाचार का आरोप अलग होता है, पैसों को गलत तरीके से विदेश भेजने एवं वहां से लाने का आरोप अलग है और दोनों की अलग-अलग जांच होती है.

इससे पहले मंगलवार को चिदंबरम की तरफ से पेश कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील पूरी कर ली थी. चिदंबरम के वकील ने कहा था कि हमने एक अर्जी फ़ाइल की है जिसमें ट्रांसक्रिप्ट की जानकारी मांगी है. PMLA के कानून के तहत अगर कोई सबूत मेरे खिलाफ लिया जाता है तो वो ट्रायल में मेरे खिलाफ काम आएगा, इसलिए मुझे उस सबूत की जानकारी होनी चाहिये. चिदंबरम के वकील ने कहा था कि अगर ED मेरे खिलाफ आरोपों को लाती है, मुझसे सवाल करती है, मेरे जवाब रिकॉर्ड पर लेती है, तो ये आरोपी का अधिकार हो जाता है कि उन जवाब को भी कोर्ट के सामने रख सके.

अभिषेक मनु सिंघवी ने आपातकाल के समय के एक फैसले का जिक्र किया जिसमें आरोपी के अधिकारों का जिक्र किया गया है. उन्‍होंने कहा था कि चिदंबरम के खिलाफ जो भी आरोप PMLA के अंतर्गत लगाए गए वो 2009 में PMLA में जोड़े गए, जबकि भ्रष्टाचार का मामला 2007 का था. चिदंबरम के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जिस PMLA के तमाम धारा के तहत चिदंबरम को आरोपी बनाया गया वो धाराएं पैसों के लेन-देन के समय मौजूद ही नहीं थीं. आप एक शख्स को ऐसे अपराध के लिये मुख्‍य आरोपी (Kingpin) सिद्ध करने में लगे हैं, जो अपराध उस वक़्त पर मौजूद ही नहीं था.

चिंदबरम के वकील सिंघवी ने कहा था कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसले का आधार था कि मैं जांच में सहयोग नहीं कर रहा और कानून से भाग सकता हूं लेकिन चिदंबरम तो हमेशा पूछताछ के हाजिर होते रहे हैं, जब भी उन्हें बुलाया जाता है. अगर CBI के मनमुताबिक वो जवाब नहीं दे रहे तो इसका मतलब ये नहीं कि वो जांच से बच रहे है. इस केस में अपराध की गंभीरता का हवाला दिया जा रहा है. हाईकोर्ट के जज ने भी अपने फैसले में इसका बार-बार जिक्र किया है. लेकिन गंभीरता बड़ा "सब्जेक्टिव टर्म" है. CRPC में 7 साल तक की सज़ा को कम गंभीरता वाला अपराध माना जाता है.

दरअसल, चिदंबरम ने ईडी की गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई हुई है जिस पर सुनवाई हो रही है. कपिल सिब्बल का आरोप है कि ईडी ने जांच को कानूनी प्रकिया से नहीं किया, न तो केस डायरी बनाई और न ही किसी ऐसे दस्तावेज को साझा किया जो आरोपी को दिया जाना था. कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया था कि ईडी ने जो हलफनामा फ़ाइल किया उसे पहले ही मीडिया में रिलीज कर दिया गया, इसका ईडी के वकील सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया था. PLC



 

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