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Saturday, December 5th, 2020

 HC का संज्ञान उम्मीद की किरण

लखनऊ.  गैंगरेप की शिकार दलित लड़की के परिजनों को मामले के ट्रायल तक सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की गई है. पत्र याचिका में कहा गया है कि हाथरस जिला और पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारियों कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए जो इस मामले की जांच को किसी भी तरह से प्रभावित कर सकते हैं. पत्र याचिका में परिजनों को बगैर विश्वास में लिए रात के अंधेरे में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार किए जाने पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. पत्र में कहा गया है जिस तरह से जल्दबाजी में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार किया गया है वह पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

यूपी के हाथरस में युवती के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. हाथरस मामले को लेकर विपक्षी दल सरकार को घेरने की कोशिश में है. प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को अपने ट्वीट में लिखा, "इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की ओर से मजबूत और उत्साहनजक आदेश दिया गया. हाथरस रेप पीड़िता के लिए न्याय की मांग पूरा देश कर रहा है. हाईकोर्ट का आदेश अंधेरे और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पीड़िता के परिवार के साथ किए गए अमानवीय एवं अन्यायपूर्ण व्यवहार के बीच आशा की किरण दिखाता है."

हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी की ओर से चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर को भेजे गए लेटर पिटीशन में मामले को बेहद गंभीर व शर्मनाक बताते हुए इसे अर्जेन्ट बेसिस पर सुनने और कोई आदेश जारी किये जाने की गुहार लगाई गई है.

जबरन अंतिम संस्कार पर भी उठे सवाल

पत्र याचिका में कहा गया है कि हाथरस की निर्भया के साथ पहले तो दरिंदों ने हैवानियत कर उसे मौत के घाट उतारा. इसके बाद हाथरस के सरकारी अमले ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए रात के अंधेरे में जबरन अंतिम संस्कार कर दिया. इसमें परिवार वालों को भी शामिल नहीं होने दिया गया. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पत्र याचिका को हाईकोर्ट पीआईएल यानी जनहित याचिका के तौर पर मंज़ूर करते हुए यूपी सरकार से जवाब तलब कर सकता है. पीड़िता के साथ हैवानियत और उसकी मौत के मामले को लेकर पूरे प्रदेश के लोगों में उबाल है. पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरे प्रदेश में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. PLC.

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