शाही इमाम मौलाना बुखारी की इस बात के लिए प्रशंसा करनी चाहिए कि उन्होने सांप्रदायिकता विरोधी ताकतों को बल प्रदान किया है : सपा
Published on January 30, 2012 by News Desk · No Comments
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आई.एन.वी.सी,,
लखनऊ
समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने वजूद को बनाए रखने के लिए हैरान-परेशान कांग्रेस और भाजपा अब एक सुर में बोलने लगे है। समाजवादी पार्टी के बढ़ते जनसमर्थन से बौखलाए कांग्रेस के राश्ट्रीय महासचिव हो या भाजपा दोनों को मौलाना बुखारी का समाजवादी पार्टी को समर्थन रास नहीं आया है। उन्होने जामा मिस्जद, दिल्ली के शाही इमाम को सांप्रदायिक होने का खिताब दिया है। जबकि हकीकत यह है कि शाही इमाम मौलाना बुखारी की इस बात के लिए प्रशंसा करनी चाहिए कि उन्होने सांप्रदायिकता विरोधी ताकतों को बल प्रदान किया है। प्रदेश को जंगलराज से बचाने में अपना सहयोग किया है। इसके लिए सभी धर्मनिरपेक्ष लोगों को उनका शुक्रगुजार होना चाहिए।
लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने की और अपने मनपसंद व्यक्ति या दल को समर्थन देने की छूट रहती है। मौलाना बुखारी को यदि श्री मुलायम सिंह यादव की कथनी-करनी पर विश्वास है और वे यह समझते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार में मुस्लिमों के जानमाल की हिफाजत होगी और वे इसलिए समाजवादी पार्टी को विधान सभा चुनाव में जिताने की मतदाताओं से अपील करते हैं तो इसमें किसी को भी क्यो असुविधा होनी चाहिए।
वैसे समाजवादी पार्टी को शाही इमाम के समर्थन में सांप्रदायिकता देखने वोले दिग्गी राजा भूल जाते है कि इस देश में सांप्रदायिकता को हवा देने का काम कांग्रेस ही करती आई है। अयोध्या में ताला खुलने और िशलान्यास की घटनाएं कांग्रेस राज में हुई। कांग्रेस के शासन में ही बाबरी मिस्जद तोड़ी गई। उन्हें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस की जब केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकारें थी तभी मिस्जद में मूर्तियां रखने की साजिश हुई थी। श्री मुलायम सिंह यादव तो पूरे जीवन सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ते रहे हैं और केंद्र में उनकी वजह से ही भाजपा सत्ता में नहीं आ पाई है। मुसलमान इस बात को कभी नहीं भूल सकते हैं कि श्री मुलायम सिंह यादव ने अपनी सरकार गंवाने का ख़तरा उठाकर भी बाबरी मिस्जद को गिरने से बचाया था। उन्होने मुस्लिमों को आबादी के आधार पर आरक्षण देने की बात की जबकि कांग्रेस अल्पसंख्यकों को साढ़े चार प्रतिशत आरक्षण देकर टरका रही है और भाजपा तो इसका घोर विरोध कर रही है। मुस्लिमो को जितना भरोसा श्री यादव पर है उतना किसी अन्य नेता पर नहीं।
सच तो यह है कि कांग्रेस-बसपा और भाजपा का त्रिकोण है जो प्रदेश की राजनीति को प्रदूशित कर रहा है। कांग्रेस की दोनों से सांठगांठ है। इसीलिए गुंजरात में कांग्रेस के विज्ञापन में नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की जाती है और बसपा के हाथी को मोटा होने के लिए केंद्रीय मदद का चारा परोसा जाता है। गुजरात को भाजपा और उत्तर प्रदेश में बसपा राज में चाहे जितना अत्याचार हो कांग्रेस के कान पर जूं नहीं रेंगती है। उनके जन विरोधी कार्यो पर बंदिश नहीं लगती है। जो लोग खुद सांप्रदायिक रंग में रंगे रहे है, वे दूसरों पर कीचड़ उछालें यह अनैतिक है।
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