भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 विश्व को एक नई दिशा देने में सक्षम – सलमान खुर्शीद

Published on December 11, 2011 by   ·   No Comments Print This Post Print This Post

अंजु अग्निहोत्री
आई.एन.वी.सी,,
लखनऊ,,
सिटी मोन्टेसरी school द्वारा आयोजित `विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 12वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन´ का उद्घाटन सलमान खुशीzद, केंद्रीय क़ानून व न्याय मंत्री, भारत सरकार ने  दीप प्रज्वलित कर किया, समारोह की अध्यक्षता प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने की। विश्व एकता, विश्व शांति एवं विश्व के 2 अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य को समर्पित इस ऐतिहासिक सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर विश्व के 70 देशों से पधारे मुख्य न्यायाधीशों, उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्तियों, क़ानूनविदों्, शांति प्रचारकों व अन्य जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति से जगमगा उठा। इस ऐतिहासिक अवसर पर सी.एम.एस. छात्रों ने जहां सर्व-धर्म प्रार्थना एवं वल्र्ड पार्लियामेन्ट की अनूठी प्रस्तुति के माध्यम से एकता व शांति का अलख जगाया तो वहीं दूसरी ओर देश-विदेश से पधारे प्रख्यात न्यायविदों ने अपने सारगभिzत संबोधन में विश्व के 2 अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य हेतु सी.एम.एस. के 42,000 छात्रों की अपील का पुरजोर समर्थन किया।      इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य अतिथि सलमान खुशीzद, केंद्रीय क़ानून व न्याय मंत्री, भारत सरकार ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 विश्व को एक नई दिशा देने में सक्षम है। भारतीय संविधान की यह अनूठी धारा अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को बढ़ावा देती है और देशों के बीच सम्मानजनक व न्यायपूर्ण संबंध स्थापित करती है। श्री खुशीzद ने कहा कि विश्व एकता व विश्व शांति के इसी संदर्भ में हमारे पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू जी ने भी कहा था कि या तो विश्व एक हो जाएगा अन्यथा नष्ट हो जाएगा। इस अवसर पर श्री खुर्शीद  ने विभिन्न देशों से पधारे न्यायविदों व क़ानूनविदों का सम्मान करते हुए कहा कि ये न्यायविद् विभिन्न क़ानून व्यवस्था, विभिन्न संस्कृतियों एवं क्षेत्रों से आए हैं किंतु सत्य की भाषा सभी क़ानून व्यवस्था में एक ही होती है। हम यहां मानवजाति के कल्याण, ज्ञान व स्तंत्रता के लिए एकत्रित हुए हैं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने कहा कि सिटी मोन्टेसरी school ने बच्चों के अधिकारों को लेकर जो आवाज पूरे विश्व में बुलंद की है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। उन्होंने कहा कि विश्व में अराजकता, आतंकवाद व अन्य अपराधों की रोकथाम हेतु मज़बूत अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व्यवस्था बेहद जरूरी है। इस अवसर पर युगांडा के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बेंजामिन ओडोकी, एमीरिटस के मुख्य न्यायाधीश एवं यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विन्सेन्ट ए. डी. गैटानो, इजराइल सुप्रीम कोर्ट के डेप्यूटी प्रेसीडेन्ट न्यायमूर्ति इलीजर रिवलिन आदि न्यायमूर्तियों ने विचार व्यक्त किए।     इससे पहले आज सी.एम.एस. द्वारा निकाले गए विशाल `विश्व एकता मार्च´ में 70 देशों से पधारे मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों, क़ानूनविदों व विश्व शांति समर्थकों ने जोरदार भागीदारी कर “विश्व के 2 अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य´´ की आवाज बुलंद की। कानपुर रोड स्थित पुरानी चुंगी से सी.एम.एस. कानपुर रोड ऑडिटोरियम तक निकाले गए विशाल `विश्व एकता मार्च´ में देश-विदेश के न्यायविदों व क़ानूनविदों ने विश्वव्यापी आतंकवाद के समाधान, विश्व के दो अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य एवं `प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व्यवस्था´ की पुरजोर अपील की एवं सी.एम.एस. के विश्व एकता अभियान का पुरजोर समर्थन किया। विश्व के दो अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य एवं `प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व्यवस्था´ के लिए सी.एम.एस. द्वारा निकाले गए विशाल `विश्व एकता मार्च´ में देश-विदेश से पधारे इन प्रख्यात न्यायविदों व क़ानूनविदों ने शामिल होकर सिद्ध कर दिया कि संसार भर के बच्चों के भविष्य को लेकर उठाए प्रश्नों को टाला नहीं जा सकता। इस विशाल एकता मार्च में न्यायमूर्ति बी. जे. ओडोकी, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट, युगांडा, प्रो. अब्दुल सलाम अजीमी, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट, अफगानिस्तान, न्यायमूर्ति फेडरिक इगोन्डा नेन्डे, मुख्य न्यायाधीश, सेशल्स, न्यायमूर्ति हिलेरियो जी. डेविड जूनियर, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, फिलीपीन्स आदि अनेक न्यायमूर्तियों ने विश्व एकता मार्च का नेतृत्व किया। मार्च में सी.एम.एस. की सभी शाखाओं की प्रधानाचार्याओं व शिक्षक/शिक्षिकाओं ने भी बड़े उत्साह से भागीदारी की, साथ ही सी.एम.एस. के हज़ारों छात्रों ने हाथों में ग्लोब लेकर न्यायाधीशों की dress में एवं सभी धर्मो के प्रतिनिधि के रूप में बड़े आकर्षक वस्त्र पहनकर एकता मार्च में भव्य सुंदरता प्रदान कर आकर्षक बनाया।     लखनऊ की सरजमीं पर चल रहे इस ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन के दूसरे दिन आज अपरान्ह: सत्र में 70 देशों से पधारे न्यायविदों व क़ानूनविदों ने जमकर चर्चा परिचर्चा की जिसकी गूंज विश्व के कोने-कोने में पहुंच रही है। न्यूजीland के जिला न्यायालय की जज माननीया न्यायमूर्ति सुश्री मैरी एलीजाबेथ शार्प ने कहा कि यदि हम वाकई मानवता की भलाई चाहते हैं तो हमें वैश्विक न्याय के अपने प्रयासों को जारी रखना पडेगा। जंजीबार के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री ओमर आ मक्कुनगू ने कहा कि विश्व भर में बच्चों के हितों की रक्षा के लिए कई क़ानून बनाए गए हैं, लेकिन इन क़ानूनों के बावजूद बच्चों व आने वाली पीिढयों का भविष्य इन क़ानूनों को लागू करने के तरीकों पर निर्भर है। उन्होने कहा कि विश्व को सबसे अच्छा उपहार जो हम दे सकते हैं वो है एक सुरक्षित, स्वस्थ, शिक्षित एवं सक्षम भावी पीढी। उरूग्वे के इन्टरनेशल एसोसिएशन आफ जजेज की उपाध्यक्ष माननीया सुश्री क्रिस्टीना क्रेस्पो ने उद्दश्यपूर्ण शिक्षा के महत्व पर जोर डालते हुए कहा कि आज सभी देशों पर भावी पीढी के लिए समान रूप से क्वालिटी एजुकेशन उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व है। घाना के सर्वोच्च न्यायालय के जज माननीय न्यायमूर्ति श्री जोन्स दोत्से ने इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को आएाजित करने के लिए सीएमएस व इसके संयोजक डॉ जगदीश गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस सम्मेलन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए आवश्यक है कि विश्व के बच्चों के सुरक्षित भविश्य के लिए यहां विर्णत विकल्प सिर्फ बातें बनकर न रह जाएं बल्कि इसके लिए एक टास्क फोर्स का गठन हो जो विश्व भर में बच्चों के बारे में लिए जा रहे निर्णयों की निरंतर निगरानी करता रहे।     इस ऐतिहासिक सम्मेलन के संयोजक व सी.एम.एस. संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ॰ जगदीश गांधी नेएक प्रेस कान्फ्रेन्स में मुख्य न्यायाधीशों के विचारों से अवगत कराते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ में पांच वीटो पावर के होते हुए यह समानता संभव नहीं है इसलिए एक प्रजातािंत्रक विश्व सरकार का गठन अतिआवश्यक है। विश्व सरकार, विश्व संसद और अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व्यवस्था ही विश्व को बचाने में सक्षम होगी। संयुक्त राष्ट्र संघ का यह बदला रूप ही मानव जाति का कल्याण कर सकता है व आतंकवाद, अशिक्षा, बेरोजगारी और पर्यावरण संबंधी समस्याओं को नियिंत्रत कर सकता है। डा गांधी ने आगे बताया कि मुख्य न्यायाधीशों ने सी.एम.एस. के बच्चों की विश्व एकता की अपील को ध्यानपूर्वक सुना व इस पर गहरा विचार-विमर्श किया। इस अपील में छात्रों ने विश्व के दो अरब बच्चों की ओर से इन मुख्य न्यायाधीशों से कहा कि हम बच्चे एक सुरक्षित भविष्य चाहते हैं। आज ऐसी क़ानून व्यवस्था  की आवश्यकता है, जिससे विश्व में न्याय हो और एकता व शांति स्थापित हो सके।     सी.एम.एस. के मुख्य जन-संपर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि आज सायं `विश्व के मुख्य  न्यायाधीशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन´ में पधारे 70 देशों के न्यायविदों व क़ानूनविदों ने हजरतगंज स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ॰ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर इन महान विभूतियों के प्रति अपना हादिzक सम्मान प्रकट किया।

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