सभ्यताओं और परम्पराओं से परिचय ही सच्ची शिक्षा है – उमाशंकर गुप्ता

Published on September 30, 2011 by   ·   1 Comment Print This Post Print This Post

आई.एन.वी.सी,,

भोपाल,,

गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति शाश्वत है। गाँधी जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने इस शाश्वत सत्य को पहचाना। इसलिये उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। श्री गुप्ता ने कहा कि जो महापुरुष नि:स्वार्थ भाव से भारत को समझकर लोकहित में सही नीतियों और रीतियों की रचना करेंगे, वे ही भविष्य में याद रखे जायेंगे। गृह मंत्री श्री गुप्ता आज शासकीय मौलाना आजाद केन्द्रीय वाचनालय (सेंट्रल लायब्रेरी) में हिन्द स्वराज्य पुस्तक के वाचन और विवेचन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री गुप्ता ने इस अनूठे आयोजन के लिये स्कूल शिक्षा विभाग को साधुवाद दिया।

हिन्द स्वराज्य पुस्तक के वाचन और विवेचन के पाँचवे दिन आज स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस ने कहा कि गाँधी जी की इस पुस्तक में आम-आदमी के प्रति बेहद संवेदनशीलता का परिचय मिलता है। श्रीमती चिटनीस ने कहा कि हिन्द स्वराज्य पुस्तक हमें मानवीयता की शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि जो सभ्यताओं और परम्पराओं से परिचय कराये वही सच्ची शिक्षा है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता दैनिक भास्कर समाचार-पत्र के समूह सम्पादक श्री श्रवण गर्ग ने कहा कि हिन्द स्वराज्य गाँधी जी की आत्मा का दस्तावेज है। गाँधी जी स्वप्नदर्शी युग-पुरुष थे। उन्होंने 40 वर्ष की उम्र में हिन्द स्वराज्य लिखते समय जो कुछ देखा वह सारी परिस्थितियाँ हमारे देश के सामने हैं। गाँधी जी ने यूरोपीय सभ्यता से दुनिया को हो रहे नुकसान को बताया था। गाँधी जी शहरीकरण नहीं गाँवों की आत्मनिर्भरता चाहते थे। आज हमारे ग्रामीण उद्योग और छोटे-छोटे कल-कारखाने नष्ट होते जा रहे हैं। आज देश में दो हजार जनसंख्या पर सिर्फ एक डॉक्टर उपलब्ध है। पिछले 5-7 सालों में जीवनरक्षक दवाओं की कीमत में 137 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि हुई है। देश की अदालतों में न्यायाधीशों के सैंकड़ों पद रिक्त पड़े हैं और लाखों अदालती मामले आज भी लंबित हैं।

श्री गर्ग ने कहा कि गाँधी जी ने अहिंसा का सामुदायिक करण किया। उन्होंने मानवता की रक्षा के लिये सारी दुनिया को अहिंसा का हथियार दिया। देश को आजादी के लिये उन्होंने इसी अहिंसा रूपी अस्त्र का इस्तेमाल करना सिखाया। श्री गर्ग ने कहा कि गाँधी जी ने सिर्फ 40 वर्ष की आयु में हिन्द स्वराज्य पुस्तक को लिखा और आने वाले 40 सालों तक वे अपने लिखे एक-एक शब्द पर अक्षरश: कायम रहे। गाँधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में वकालत का पेशा और जोहांसबर्ग जैसे बड़े शहर को छोड़कर फिनिक्स आश्रम में जनसेवा के लिये अपनी गतिविधियाँ संचालित कीं। जिस तरह फिनिक्स पक्षी बार-बार अपनी राख से उठ खड़ा होता है, वैसे ही गाँधी जी और उनके विचार कभी नहीं मरेंगे। वे सैंकड़ों बार अपनी राख से पैदा होते रहेंगे।

इस दौरान विशिष्ट वक्ता के रूप में मौजूद पातंजलि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मिथिलेश प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि गाँधी जी मानवीयता के पक्षधर थे। एक मानव दूसरे मानव के हितों का चिंतन करे, यही विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन में मिलते हैं। उन्होंने कहा कि हमें इन महापुरुषों के सिद्धांतों का अनुसरण कर राष्ट्र विकास में सहभागी बनना होगा। हिन्द स्वराज्य पुस्तक के वाचन और विवेचन के अवसर पर श्रोताओं ने बड़ी संख्या में प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

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