भारत में औपनिवेशिक सत्‍ता ने परम्‍परागत नदी प्रणाली को नष्‍ट कर दिया – आदित्य मुख़र्जी

Published on August 31, 2011 by   ·   No Comments Print This Post Print This Post

आई.एन.वी.सी,,
दिल्ली,,
जल संकट और इसकी प्रबंधन प्रणालियों के बारे में महर्षि दयानंनद विश्‍वविद्यालय, रोहतक के इतिहास विभाग के प्राध्‍यापक डॉ. श्रीकृष्‍ण द्वारा लिखित पुस्‍तक ‘ए ब्रीफ हिस्‍ट्री ऑफ वाटर रिसोर्सेज इन इंडिया’ का आज दिल्‍ली पुस्‍तक मेले में लोकार्पण किया गया।

इस अवसर पर प्रो. मुखर्जी ने बताया कि भारत में औपनिवेशिक सत्‍ता ने परम्‍परागत नदी प्रणाली को नष्‍ट कर दिया जो कि सिंचाई और भूमि की पुन: उर्वरा शक्‍ति के लिए उपयोगी थी। ब्रिटिश शासकों ने जो नयी प्रणाली कायम की, उससे बिहार जैसे राज्‍यों में बाढ़ और सूखे की विभीषिका का सामना करना पड़ा। उन्‍होंने बताया कि जल-संरक्षण की परम्‍परा हमारे अपने अनुभवों, अभ्‍यासों और बुद्धिमत्‍ता पर आधारित होनी चाहिए।

प्रकाशन विभाग की अपर महानिदेशक श्रीमती अरविन्‍द मनजीत सिंह ने बताया कि विभाग किफायती कीमतों पर पुस्‍तकें उपलब्‍ध करा कर जन-जन को ज्ञान से सशक्‍त करके अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्‍होंने बताया कि विभाग ने इतहिास और स्‍वतंत्रता संघर्ष, कला एवं संस्‍कृति, जीव-जन्‍तुओं एवं वनस्‍पतियों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव-चित्रणों, बाल साहित्‍य और संदर्भ ग्रंथों आदि पर 8000 से अधिक पुस्‍तकें प्रकाशित की हैं। विभाग साहित्‍यिक पत्रिकाएं जैसे हिन्‍दी और उर्दू आजकल, बच्‍चों के लिए हिन्‍दी में बालभारती, कुरूक्षेत्र और हिन्‍दी एवं अंग्रेजी में ग्रामीण विकास पर योजना (13 भाषाओं में) और अंग्रेजी में एम्‍प्‍लायमेंट न्‍यूज, हिन्‍दी और उर्दू में भी रोजगार समाचार आदि का भी प्रकाशन करता है।

पुस्‍तक लोकार्पण समारोह के बाद वर्तमान भारत में जल संकट विषय पर संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रो. मुखर्जी और लेखक श्रीकृष्‍ण उपस्‍थित थे। उन्‍होंने जल की खपत और उसके अभाव की ओर लोगों का ध्‍यान आकृष्‍ट किया।

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