उत्तर प्रदेश में शिक्षा का बुरा हाल 6 लाख छात्रों ने कम्पार्टमेण्ट परीक्षा छोड़ी

Published on July 31, 2011 by   ·   No Comments Print This Post Print This Post

आई.एन.वी.सी,,
लखनऊ ,,
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डा0 मनोज मिश्र ने प्रदेश की हाई स्कूल की कम्पार्टमेण्ट परीक्षा में लगभग 6 लाख छात्रों के परीक्षा छोड़ देने पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है। डा0 मिश्र ने प्रदेश की बसपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार में शिक्षा का इतना बुरा हाल हो गया है कि छात्रों ने मातृभाषा हिन्दी में कम्पार्टमेण्ट परीक्षा छोड़ दी। प्रदेश की माध्यमिक, बेसिक, उच्च तथा तकनीकी शिक्षा बेहाली और बदहाली का शिकार है। प्रदेश में ज्यादातर शिक्षा संस्थान शिक्षा के बजाय धन उगाही के केन्द्र बन गए हैं। दसवीं के कम्पार्टमेण्ट की परीक्षा छोड़ देने के पीछे सरकारी स्तर के नाकाफी प्रयासों के कारण सूचना छात्रों को नहीं मिल सकी। जो बोर्ड छात्रों को हिन्दी में पास नहीं करा सकता है उसका भगवान ही मालिक है। प्रदेश प्रवक्ता डा0 मिश्र ने सरकार के उस दिशा-निर्देश की भी धज्जियॉं उड़ाई जिसमें छात्रवृत्ति वितरण में सरकारी कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को वरीयता दी जाने की बात कही गई है। सहायता प्राप्त कालेजों तथा निजी कालेजों में पढ़ने वाले छात्रों के साथ भेदभाव की पार्टी
ने निन्दा की। डा0 मिश्र ने व्यंग करते हुए कहा कि भ्रष्ट शिक्षा अधिकरियों की मनमानी को रोक पाने में विफल सरकार ने छात्रों को ही आपस में बांट दिया। रोग को खत्म करने के बजाय सरकार रोगी को ही खत्म करने के फार्मूले पर काम कर रही है। डा0 मिश्र ने कहा कि सरकार का तंत्र भ्रष्ट एवं पूर्णतया विफल हो गया है तथा शिक्षा अधिकारी निरंकुश हो गए हैं। इस निरंकुशता के कारण सहायता प्राप्त तथा निजी स्कूलों के छात्रों को क्यों दण्डित किया जा रहा है। डा0 मिश्र ने प्रदेश के बी0एड0 के छात्रों के हो रहे शोषण पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सराकर ने एक तो बी0एड0 की फीस ज्यादा घोषित कर दी तथा दुसरी ओर छात्रों से वसूली के अन्य दरवाजे भी खोल दिए। बी0एड0 की औपचारिक
फीस रू0 51250/- के अलावा टूर के नाम पर, काशन मनी तथा अन्य मदों के नाम
पर सरकार ने वसूली की खुली छूट दे दी है। जिससे प्रदेश में छात्रों से
अंधाधुंध वसूली की जा रही है। डा0 मिश्र ने बी0एड0 छात्रों को इस शोषण से
निजात दिलाने की प्रदेश की राज्यपाल से मांग की।
प्रदेश प्रवक्ता ने प्रदेश में सरकारी किताबों के अभाव के लिए सरकार को
जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि किताबों के प्रकाशन में ठेका देने में
हुई देरी तथा लेन-देन के कारण किताबें समय से प्रकाशित नहीं हो पाई। पूरे
प्रदेश के छात्र किताबों के इस अभाव से बेहद परेशान हैं। किताबों की इस
कमी को देखते हुए छात्रों से किताबों के दाम छपे हुए मूल्यों से ज्यादा
वसूले जा रहे हैं।
डा0 मिश्र ने प्रदेश की तकनीकी शिक्षा के खस्ताहाल पर कहा कि प्रदेश के
इंजीनियरिंग, प्रबन्धन तथा अन्य संस्थानों में छात्रों का टोटा प्रदेश की
तकनीकी शिक्षा का आइना पेश कर रहे हैं। प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा
की इस बदहाली की जिम्मेदार बसपा सरकार निष्क्रिय तथा दिशाहीन है तथा
प्रदेश इस दिशाहीनता के कारण बदनाम हो रहा है।

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