साम्‍प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की स्थिति में सरकार के पास हस्‍तक्षेप करने के अलावा कोई दूसरा विकल्‍प नहीं होता – उपराष्‍ट्रपति

Published on July 30, 2011 by   ·   No Comments Print This Post Print This Post

आई.एन.वी.सी,
दिल्ली,
उपराष्‍ट्रपति श्री एम हामिद अंसारी ने आज एक कार्यक्रम में वर्ष 2009 और 2010 के लिए राष्‍ट्रीय साम्‍प्रदायिक सदभाव पुरस्‍कार प्रदान किए।

वर्ष 2009 के लिए व्‍यक्तिगत संवर्ग में यह पुरस्‍कार डॉ. मोहम्‍मद हनिफ खान शास्‍त्री को प्रदान किया गया। डॉ. शास्‍त्री संस्‍कृत के विद्वान हैं। उन्‍होंने गीता और कुरान में सामंजस्‍य, वेद और कुरान से महामंत्र और गायत्री एवं सुरा फातिहा समेत कई पुस्‍तकें लिखी हैं। डॉ. शास्‍त्री ने अपनी किताबों और विचारों से साम्‍प्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम किया है।

वर्ष 2010 के लिए व्‍यक्तिगत संवर्ग में आचार्य लोकेश मुनी को इस पुरस्‍कार से नवाजा गया। आचार्य लोकेश मुनी एक सामाजिक कार्यकर्ता और अच्‍छे वक्‍ता हैं जिन्‍होंने अपने विचारों और लेखों के जरिए समाज में साम्‍प्रदायिक सद्भाव के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है। श्री मुनी दिल्‍ली स्थित एक स्‍वयंसेवी संस्‍था अहिंसा विश्‍व भारती के मुख्‍य कार्यकर्ता हैं जिसका उद्देश्‍य अहिंसा, शांति और साम्‍प्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना है।

वर्ष 2009 के संस्‍थागत संवर्ग में सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड सोशल वेलफेयर को इस पुरस्‍कार से नवाजा गया। संगठन की तरफ से महासचिव श्रीमती सरोज खान ने यह पुरस्‍कार ग्रहण किया। 1976 में पंजीकृत यह संस्‍था साम्‍प्रदायिक सद्भाव, मानवाधिकार और जरूरतमंदों एवं वंचितों के पुनर्वास का काम करती है।

अपने संबोधन में उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि साम्‍प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की स्थिति में सरकार के पास हस्‍तक्षेप करने के अलावा कोई दूसरा विकल्‍प नहीं होता है। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के हस्‍तक्षेप या तो हालात रोकने वाले होते हैं या फिर सुधार वाले होते हैं।

उन्‍होंने कहा कि साम्‍प्रदायिक सद्भाव को बनाये रखने के लिए चेतना युक्‍त कार्यक्रम को बढ़ावा देना चाहिए और आज का यह कार्यक्रम इस दिशा में सरकार की एक अच्‍छी कोशिश है।

Twitter del.icio.us Digg Facebook linked-in Yahoo Buzz StumbleUpon

Tags:  , , , , , ,

Readers Comments (0)




Please note: Comment moderation is enabled and may delay your comment. There is no need to resubmit your comment.

WordPress Blog
WordPress Themes