बी.एस.पी.अपने कार्यकर्ताओ के खून पसीने की कमाई से चलती है : मायावती

Published on May 30, 2011 by   ·   No Comments Print This Post Print This Post
सुरेंदर अग्निहोत्री ,,
आई.एन.वी.सी.
लखनऊ,
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राश्ट्रीय अध्यक्ष  मायावती  ने पंजाब, हरियाणा,
हिमांचल प्रदेष, जम्मू-कष्मीर व चण्डीगढ़ राज्य यूनिट के कार्यकर्ता सम्मेलन में
पार्टी संगठन को और ज़्यादा मज़बूत बनाने व जनाधार को बढ़ाने का आह्वान करते हुये
कहा कि देष में बड़े पैमाने पर व्याप्त ग़रीबी, बेरोज़गारी व जानलेवा महँगाई से
छुटकारा पाने के लिये देष भर में, हर स्तर पर, “बी.एस.पी. मूवमेन्ट” को मज़बूत करना आवष्यक है। उपरोक्त पाँचों राज्यों पार्टी यूनिट के वरिश्ठ कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को आज चण्डीगढ़ में आयोजित “कार्यकर्ता सम्मेलन” में सम्बोधित करते हुये मायावती जी ने कहाकि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केन्द्र की सरकार की जन-विरोधी नीतियों का ज़मीनी स्तर पर डट कर मुक़ाबला करने के लिये भी देष में
‘बी.एस.पी. मूवमेन्ट’ को मज़बूत करने की ज़रूरत है। सर्वविदित है कि बी.एस.पी.
मूवमेन्ट का जन्म ही, देष में  उपेक्षित व ग़रीबों के हितों की रक्षा
करने के लिये हुआ है और अब तक ख़ासकर केन्द्र व ज़्यादातर राज्यों की सŸाा में
रही कांग्रेस पार्टी की जन-विरोधी नीतियों व उसकी दलित-विरोधी मानसिकता का
पर्दाफाष करते हुये इसकी ग़लत नीतियों का विरोध करने के लिये बी.एस.पी. हर स्तर
पर लगातार तत्पर है। बी.एस.पी. का ऐसा ही विरोध बी.जे.पी. व अन्य विरोधी
पार्टियाो के साथ भी है। मायावती  ने कहा कि ग़रीबी, बेरोज़गारी व महँगाई
के साथ-साथ भ्रश्टाचार का अभिषाप देष को अन्दर से कमज़ोर कर रहा है तथा कांग्रेस
व भाजपा दोनों ही पार्टियाँ इसके लिये पूरे तौर पर क़सूरवार हैं, क्योंकि
केन्द्र में अपने सनकालों के दौरान इन पार्टियों ने कभी भी इस मुद्दे पर
गंभीरतापूर्वक सख्त कार्रवाई नहीं की है। केन्द्र के साथ-साथ उत्तरी  भारत के
प्रान्तों में इन पार्टियों की सरकारों पर भ्रश्टाचार के गंभीर आरोप और अब
ये विरोधी पार्टियाँ, ‘ाड्यंत्रवष, तरह-तरह के हथकण्डे अपनाकर जनता का ध्यान इस
ख़ास मुद्दे से हटाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहाकि देष भर में
बी.एस.पी. ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो अपने कार्यकर्ताओं के खून-पसीने की
कमाई से अपना संगठन चलाती है और विरोधी पार्टियों की तरह धन्नासेठों के धन पर
आश्रित नहीं है। इसीलिये उŸार प्रदेष में बी.एस.पी. की सरकार समाज के “ाोशित,
उपेक्षित व ग़रीब लोगों के हित व सम्मान में बड़े-बड़े युग-परिवर्तनीय काम करके इन
वर्गों के लोगों का जीवन सुधार कर, देष हित में, सामाजिक परिवर्तन की राह हमवार
कर रही है।
यही कारण है कि  बी.एस.पी. के गठन की ज़रूरत पड़ी और तबसे अब तक “बी.एस.पी.
मूवमेन्ट” के माध्यम से देष भर में इस प्रकार की जन-विरोधी नीति के खि़लाफ
संघर्श लगातार जारी है, जिसको देष के कोने-कोने में, ख़ासकर उŸार भारत में आपके
राज्यों में और ज़्यादा मज़बूत करने की ज़रूरत है, जोकि एक राश्ट्रीय आवष्यकता
है।
उन्होंने कहाकि बी.एस.पी. एक मानवतावादी मूवमेन्ट है, जिसका उद्देश्य दलित एवं
अन्य पिछड़े वर्गों में समय-समय पर जन्में महान सन्तों, गुरूओं व महापुरूषों में
भी खासतौर से महात्मा ज्योतिबा फूले, छत्रपति शाहूजी महाराज, श्री नारायणा
गुरू, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये
हुये रास्तों पर चलकर देश में समतामूलक समाज की स्थापना करना है।
माननीया सुश्री मायावती जी ने कहाकि ग़रीबी, बेरोज़गारी व आसमान छूती महँगाई से
आज पूरे देष में हर वर्ग व हर समाज के लोग त्रस्त हैं, परन्तु कांग्रेस के
नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार इस राश्ट्रीय समस्या के प्रति उदासीन व लापरवाह है
तथा उसके नेता केवल संकीर्ण व तुच्छ राजनीति करने पर अमादा हैं, जबकि उŸार
प्रदेष में बी.एस.पी. की सरकार ने कई कारगर उपाय करके प्रदेष की जनता को इन
मामलों में काफी राहत पहुँचायी है। स्थायी व अस्थायी रोज़गार के लाखों नये अवसर
मुहैया कराये गये हैं तथा अपने स्तर पर विभिन्न करों आदि में कमी करके जानलेवा
महँगाई से लोगों को थोड़ी राहत पहुँचायी गयी है। सर्वसमाज के 31 लाख अत्यन्त
ग़रीब परिवारों की महिला मुखिया को “उŸार प्रदेष मुख्यमंत्री महामाया ग़रीब
आर्थिक मदद योजना“ के माध्यम से 400 रुपये प्रतिमाह की दर से एक मुष्त छह माह
की 2,400 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करके उनके आँसू पोंछने का काम कर रही
है। मायावती ने  कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार
द्वारा पेट्रोल की कीमत में, की गयी भारी वृद्धि के खिलाफ    बी.एस.पी. ने
‘‘देशव्यापी जन-आन्दोलन‘‘ छेड़ने का फैसला लिया है, जिसकी शुरूआत उत्तर प्रदेश
के समस्त 72 ज़िलों के ज़िला मुख्यालय पर दिनांक 31 मई सन् 2011 को विशाल
धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम करके की जायेगी।

 

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