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आई .एन .वी.सी.,,
कुरुक्षेत्र,,
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंहल ने कुरूक्षेत्र से प्रेषित एक वक्तव्य में केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि आगामी 27 मार्च तक सरकार गंगा पर पूर्व में निर्मित और निर्माणाधीन बांधों को निरस्त करने की घोषणा नहीं करती है तो संत कुंभ के बहिष्कार का दुखद निर्णय लेने को मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने बिजली निर्माण के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर काम करने का सरकार से अनुरोध किया है।
श्री सिंहल ने कुरूक्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सर्वोच्च निर्णायक संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के मध्य यह वक्तव्य जारी किया है। श्री सिंहल ने कहा कि पिछले दिनों संतों ने हरिद्वार में अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में गंगा रक्षा के सवाल पर सरकार की हीला-हवाली के विरोध में धरना दिया। संत गंगा रक्षा के सवाल पर सरकार के झूठे आश्वासनों से मर्माहत और आक्रोशित हैं और अब निर्णायक संघर्ष की मुद्रा में खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंगा को ऱाष्ट्रीय नदी की जगह राष्ट्रीय धरोहर की श्रेणी में नहीं लाती, उस पर टिहरी बांध समेत सभी निर्मित और निर्माणाधीन परियोजनाओं को रद्द करने की घोषणा नहीं करती तो संत निर्णायक कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे।
श्री सिंहल ने कहा कि हम विकास चाहते हैं लेकिन वर्तमान विकास पथ ही सर्वश्रेष्ठ विकास पथ है, ऐसा संत नहीं मानते। भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों के विनाश की कीमत पर विकास संतों और हिंदू समाज को स्वीकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार को बड़े बांधों का विकल्प तलाशना चाहिए। विद्युत उत्पादन के लिए नदियों को बांधने की बजाय वैकल्पिक उपायों पर जोर देना चाहिए। उन्होंने इसके लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और छोटे बांधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिजली निर्माण के लिए उस तकनीकी का उपयोग करना चाहिए जिससे नदी का प्रवाह अविरल बना रहे और उसके प्रवाह को पूरे तौर पर रोकने की जरुरत न पड़े।
उन्होंने कहा कि गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण में संतों, समाज और गंगा किनारे के समस्त तीर्थों, नगरपालिकाओं, संबंधित संस्थाओँ और संगठनों को शामिल किया जाए। इसके द्वारा समाज को साथ लेकर गंगा की रक्षा का समग्र अभियान छेड़ा जाना आवश्यक है।
श्री सिंहल ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद संतों के निर्देश पर किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटेगी और समाज को साथ लेकर गंगा मुक्ति संघर्ष आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
उन्होंने सरकार को गंभीरतापूर्वक शीघ्र निर्णय करने की चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार यदि 27 मार्च तक कोई ठोस कदम उठाकर संतों की शंका का समाधान नहीं करती है तो संत कुभ के बहिष्कार का अप्रिय कदम उठा सकते हैं।
Tags: BJP, गंगा पर बांध निरस्त नहीं हुए तो हो सकता है कुंभ बहिष्कार : अशोक सिंहल
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